Sunday, 11 April 2021

बौद्धदर्शन (सर्वदर्शनसङ्ग्रह)

 

·        व्याप्ति का ज्ञान तादात्म्य और उत्पत्ति से होता है।

·        तादात्म्य तथा उत्पत्ति अविनाभाव के दो रूप हैं।

·        तादात्म्य का उदाहरण आत्मा है।

·        उत्पत्ति के अन्तर्गत पञ्चकारण का समावेश है।

·        एकाकिनी प्रतिज्ञा हि प्रतिज्ञातं  न साधयेत्- सर्वदर्शन संग्रह

·        भावना चतुष्टय- सर्वं क्षणिकं क्षणिकं, सर्वं दुःखं दुःखं, सर्वं स्वलक्षणं स्वलक्षणं, सर्वं शून्यं शून्यं

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      शून्य- न सन्नासन्न सदसन्न चाप्यनुभयात्मकम्।

        चतुष्कोटिविनिर्मुक्तं तत्त्वं माध्यमिका विदुः॥

·        बौद्ध सम्प्रदाय-

1.   माध्यमिक (शून्यवाद)

2.   योगाचार (विज्ञानवाद)

3.   सौत्रान्तिक

4.   वैभाषिक (सर्वास्तिवाद)

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    माध्यमिक- केवल शून्य स्वीकार करते हैं। वह शून्य चतुष्कोटि (सत्, असत्, सदसत् तथा असन्नासत्) है। यह सम्प्रदाय नागार्जुनकृत माध्यमिक कारिका पर आधारित है।


·        योगाचार- बाह्यार्थ शून्य परन्तु चित् की सत्ता स्वीकार करते हैं। लंकावतारसूत्र (दस परिच्छेद) इसका प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इसमें चित्त के आठ प्रकार बतायें हैं तथा छह विज्ञान स्वीकार करते हैं।

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     सौत्रान्तिक- बाह्यार्थ तथा मानसिक दोनों पदार्थों को सत् परन्तु बाह्यार्थ का ज्ञान अनुमेय है। यह सम्प्रदाय सुत्तपिटक पर आधारित है। इन्होंने प्रत्यक्ष के लिए चार पदार्थों की आवश्यकता स्वीकार की है- विषय, चित्त, इन्द्रियाँ तथा प्रकाशादि सहायक तत्त्व। यह केवल वर्तमान की सत्ता स्वीकारते हैं।

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        वैभाषिक- मानसिक तथा बाह्यार्थ दोनों को सत् तथा बाह्यार्थ को प्रत्यक्षगोचर स्वीकारते हैं। ये सभी कालों की सत्ता मानने के कारण सर्वास्तिवादी हैं। इस सम्प्रदाय का आविर्भाव अभिधर्ममहाविभाषा से हुआ है।

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              बौद्धों ने सामान्य को अप्रमाणिक माना है।

·        योग- अप्राप्त्यस्यार्थस्य प्राप्तये पर्यनुयोगो योगः।

·        आचार- गुरुक्तस्यार्थस्याङ्गीकरणमाचारः।

·        विज्ञानवाद के दो प्रमुख भेद- आलय विज्ञान तथा प्रवृत्तिविज्ञान

·        आलयविज्ञान के सात भेद- चक्षुर्विज्ञान, श्रोत्रविज्ञान, घ्राणविज्ञान, जिह्वाविज्ञान, कायविज्ञान, मनोविज्ञान तथा क्लिष्ट मनोविज्ञान

·        ज्ञान के चार कारण- आलम्बन, समनन्तर, सहकारी तथा अधिपति

·        पाँच चित्तविकार/ स्कन्ध- रूपस्कन्ध, विज्ञानस्कन्ध, वेदनास्कन्ध, संज्ञास्कन्ध, संस्कारस्कन्ध।

·        थेरवाद वैभाषिक सिद्धान्त से सम्बन्धित है।

·        चार आर्यसत्य- दुःख, दुःख समुदाय, दुःखनिरोध, मार्ग

·        दुःख समुदाय- प्रत्ययोपनिबन्धन तथा हेतूपनिबन्धन

·        हेतूपनिबन्धन/भवचक्र/प्रतीत्यसमुत्पाद

·        द्वादश भवचक्र- अविद्या, संस्कार, विज्ञान, नामरूप, षडायतन, स्पर्श, वेदना, तृष्णा, उपादान, भव, जाति, जरामरण

·        अष्टांगिकमार्ग- सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वचन, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति तथा सम्यक् समाधि  

·        द्वादश आयतन- मन, बुद्धि, पञ्चकर्मेन्द्रियाँ तथा पञ्चज्ञानेन्द्रियाँ

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        माध्यमिक सम्प्रदाय-

1.   नागार्जुन- माध्यमिककारिका

2.   आर्यदेव- चतुःशतक, चित्तविशुद्धिप्रकरण

3.   बुद्धपालित

4.   भावविवेक- मध्यमार्थसंग्रह, करमणि

5.   चन्द्रकीर्ति- माध्यमिकावतार, प्रसन्नपदा,चतुःशतकटीका

6.   शान्तिदेव- बोधिचर्यावतार

7.   शान्तरक्षित- तत्त्वसंग्रह

·         योगाचार सम्प्रदाय

1.   दिङ्नाग- प्रमाणसमुच्चय

2.   धर्मकीर्ति- प्रमाणवार्त्तिक, न्यायबिन्दु, सम्बन्धपरीक्षा, प्रमाणविनिश्चय

3.   असंग- महायानसंपरिग्रह, योगाचारभूमिशास्त्र

4.   मैत्रेयनाथ- अभिसमयालंकारिका

5.   वसुबन्धु- महापरिनिर्वाणसूत्रटीका

6.   स्थिरमति

7.   शंकरस्वामी

8.   धर्मपाल

·        सौत्रान्तिक सम्प्रदाय

1.   कुमारलात- कल्पनामंडतिका

2.   श्रीलाभ-सौगान्तिक विभाषा

3.   धर्मत्रात

4.   बुद्धदेव

5.   यशोमित्र- अभिधर्मकोशटीका

·        वैभाषिक सम्प्रदाय

1.   वसुबन्धु

2.   संघभद्र

3.   कात्यायनीपुत्र

4.   शारिपुत्र

5.   वसुमित्र- प्रकरणवाद

6.   अश्वघोष

Saturday, 29 August 2020

One Liner Questions-8

1. ता वां वास्तूस्न्युश्मसि गमध्यै यत्र गावो भूरिशृङ्गा अयासः- विष्णुसूक्त


2. पुराणि देवि युवति पुरन्धिरनुव्रतं चरसि विश्ववारे- उषस् सूक्त


3. यः पृथिवीं व्यथमानामदृंहद्यः पर्वतान्प्रकुपिताँ अरम्णात्- इन्द्रसूक्त


4. तदस्य प्रियमभिपाथो अश्यां नरो यत्र देवयवो मदन्ति- विष्णुसूक्त


5. नाहं वेद भ्रातृत्व नो स्वसृत्वमिन्द्रो विदुरङ्गिरसश्च घोराः- सरमापणि सूक्त


6. को दम्पती समनसा वि यूयोदध यदग्निः श्वशुरेषु दीदयत्- सरमापणि सूक्त


7. ऋक्तन्त्रप्रातिशाख्य से किस वेद से सम्बन्धित है? -सामवेद


8. वेदान्तसार में सूक्ष्मशरीर के कितने अवयव माने है? -१७


9. तर्कसङ्ग्रहानुसार कितने रूप होते हैं? -७


10. ग्रीकभाषा किस परिवार की है? -भारोपीय परिवार


11. हेमचन्द्रसूरी किस दर्शन के आचार्य है? -जैनधर्म


12. सांख्यकारिका में करण हैं? - १३


13. तज्ञ्ज्ञानं पञ्चविधं मतिश्रुतावधिमनः पर्यायकेवलभेदेन -आर्हतदर्शन


14. वेदान्तसार में निर्विकल्पक समाधि के कितन् विघ्न हैं? -४


15. लोके हि लोहेभ्यः कठिनतराः खलु स्नेहमया बन्धनपाशाः- हर्षचरित


16. श्रीहर्षो निपुणः कविः परिषदप्येषा गुणग्रहिणी -रत्नावली


17. गजेन्द्रश्च नरेन्द्रश्च प्रायः सीदन्ति दुःखिता -मुद्राराक्षस


18. शुनःशेप के पिता का नाम क्या है? -अजीगर्त


19. वाङ्मनस आख्यान किस ग्रन्थ में है? -शतपथब्राह्मण


20. शुनःशेप आख्यान किस ग्रन्थ में है- ऐतरेयब्राह्मण


21. यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेण ब्रवीम्योमित्येतत्- कठोपनिषदि


22. तस्यैः तपो दमः कर्मेति प्रतिष्ठा वेदाः सर्वाङ्गानि सत्यमायतनम्- केनोपनिषद्


23. रक्तसंज्ञा किन वर्णों की होती हैं? -अनुनासिकवर्ण


24. फलेन मूलेन च वारिभूरुहां मुनेरिवेत्थं मम यस्य वृत्तयः -नैषधीयचरित

Friday, 28 August 2020

One Liner Questions-7

1. "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः" यह नाट्यसूत्र है? -नाट्यशास्त्र


2. कारणान्यथ कार्याणि सहकारीणि यानि च।
रत्यादेः स्थायिनो लोके तानि चेन्नाट्यकाव्ययोः॥
विभावा अनुभावास्तत् कथ्यन्ते व्यभिचारिणः।
व्यक्तः स तैर्विभावाद्यैः स्थायीभावो रसः स्मृतः॥ यह रस लक्षण है? -काव्यप्रकाश


3. विभावेनानुभावेन व्यक्तः संचारिणा तथा।
रसतामेति रत्यादिः स्थायीभावः सचेतसाम्॥ यह रसलक्षण है? -साहित्यदर्पण


4. रस सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य है? -भरतमुनि


5. काव्यमीमांसा में रससिद्धान्त का प्रतिष्ठापक आचार्य माना है? -नन्दिकेश्वर


6. उत्पत्तिवाद के आचार्य भट्टलोल्लट(नौवीं शताब्दी) किस दर्शन से सम्बन्धित है? -मीमांसा

7. अनुमितिवाद के आचार्य शंकुक(नौवीं शताब्दी) किस दर्शन से सम्बन्धित है? -न्याय


8. भुक्तिवाद के आचार्य भट्टनायक(ग्यारहवीं शताब्दी) किस दर्शन से सम्बन्धित है? -सांख्य


9. अभिव्यक्तिवाद के आचार्य अभिनवगुप्त(ग्यारहवीं शताब्दी) किस दर्शन से सम्बन्धित है? -शैव




10. चित्रतुरगन्याय की कल्पना किस आचार्य की है? -शङ्कुक


11. आचार्य भरत ने कितने रस स्वीकार किये? आठ


12. प्रेयान् रस को किसने दसवाँ रस माना है? -रुद्रट


13. भक्तिरस को प्रधानता किसने दी? -रूपगोस्वामी


14. विश्वनाथ ने किस रस को दसवाँ रस माना? -वात्सल्य


15. अभिनवगुप्त ने किस रस को मूलभूत रस माना? -शान्तरस


16. रत्याद्युद्बोधका लोकेविभावाः काव्यनाट्ययोः यह विभाव का लक्षण है? -साहित्यदर्पण


17. उद्बुद्धं कारणैः स्वैः स्वैर्बहिर्भावं प्रकाशयन्।
लोके यः कार्यरूपः सोऽनुभावः काव्यनाट्ययोः॥ यह अनुभाव का लक्षण है? -साहित्यदर्पण


18. अविरुद्धा विरुद्धा वा यं तिरोधातुमक्षमाः।
आस्वादाङ्कुरकन्दाऽसौ भावः स्थायीति संमतः॥ यह स्थायी भाव का लक्षण है? -साहित्यदर्पण


19. सात्त्विकभाव कितने हैं? -आठ


20. विशेषादाभिमुख्येन चरणाद् व्यभिचारिणः।
स्थायिन्युन्मग्ननिर्मग्नास्त्रयस्त्रिंश्च्च तद्भिदाः॥ यह व्यभिचारी भाव का लक्षण है? -साहित्यदर्पण


21. व्यभिचारीभाव की संख्या है? -३३


22. शृङ्गाररस का वर्ण है? -श्याम


23. शृङ्गाररस का देवता है? -विष्णु


24. शृङ्गार के कितने भेद हैं? - दो (संभोग तथा विप्रलभ)


25. विप्रलभ शृङ्गार के कितने भेद हैं? -५ (अभिलाषा, विरह, ईर्ष्या, प्रवास, शाप)


26. हास्यरस का देवता है? -प्रमथ


27. हास्यरस का वर्ण है? -श्वेत


28. हास्यरस के भेद है? -६ (स्मित, हसित, विहसित, अवहसित, अपहसित, अतिहसित)


29. आचार्यभरत ने हास्य के कितने भेद माने हैं? -२ (आत्मस्थ तथा परस्थ)


30. करुण रस का देवता है? -यम


31. करुण रस का वर्ण है? -कपोत


32. अग्निपुराण में करुणरस के कितने भेद माने हैं? -३ (धर्मोपघात जन्य, वित्तविनाशजन्य तथा शोकजन्य)


33. रौद्ररस का देवता है? रुद्र


34. रौद्ररस का वर्ण है? -रक्त


35. अग्निपुराण में रौद्र के भेद हैं? -३ (आङ्गिक, वाचिक, वेशभूषाजन्य)


36. वीररस का देवता है? -महेन्द्र


37. वीररस का वर्ण है? -स्वर्ण


38. वीररस के कितने भेद हैं? -४ (दानवीर, धर्मवीर, युद्धवीर, दयावीर)


39. अग्निपुराण में वीररस के भेद माने हैं? -३ (दानवीर, धर्मवीर, युद्धवीर)


40. भयानक रस का देवता है? -काल


41. भयानक रस का वर्ण है? -कृष्ण


42. बीभत्सरस का देवता है? -महाकाल


43. बीभत्सरस का वर्ण है? -नील


44. अद्भुतरस का देवता है? -गन्धर्व


45. अद्भुतरस का वर्ण है? -पीत


46. शान्तरस का देवता है? -नारायण


47. शान्तरस का वर्ण है? -कुन्दपुष्पवत्

 

One Liner Questions-6

1.न हि रसादृते कश्चिदप्यर्थः प्रवर्तते- नाट्यशास्त्र


2. नाट्यं भिन्नरुचेर्जनस्य बहुधाप्येकं समाराधनम्- मालविकाग्निमित्र


3. बालरामायण तथा हनुमन्नाटक किस विधा के ग्रन्थ हैं?- महानाटक


4. महाकाव्य में दिव्यादिव्य नायक का उदाहरण है?- श्रीकृष्ण


5. प्रकरण रूपक में नायक होते हैं? -अमात्य, विप्र तथा वणिक्


6. भाण रूपक में नायक होता है?- विट


7. डिम रूपक में नायक होते हैं? -देवता, गन्धर्व, यक्ष,राक्षस


8. प्रियदर्शिका तथा रत्नावली किस विधा के उदाहरण हैं? - नाटिका


9. राजशेखर की कर्पूरमञ्जरी उदाहरण है? -सट्टक उपरूपक


10. कालिदास का विक्रमोर्वशीयम् उदाहरण है? -त्रोटक का


11. नाट्यवेदं ततश्चक्रे चतुर्वेदाङ्गसम्भवम्- नाट्यशास्त्र


12. संवाद सूक्तों से नाट्य की उत्पत्ति स्वीकार की हैं? मैक्समूलर, सिल्वॉलेवी, हर्टल आदि


13. यूनानी रूपकों से नाट्य उत्पत्ति स्वीकार की हैं? वेबर तथा विन्डिश


14. पुत्तलिका नृत्य से नाट्य उत्पत्ति स्वीकार की हैं? प्रो. पिशेल


15. नाट्य उत्पत्ति में मृतात्म श्राद्ध सिद्धान्त स्वीकार किया? -डॉ. रिजवे


16. नाट्य उत्पत्ति में छाया-सिद्धान्त स्वीकार किया हैं? -ल्यूडर्स तथा स्टेन कोनो

Thursday, 27 August 2020

One Liner Question-5

कुसुमशेखरविजय किस रूपक का उदाहरण है? -ईहामृग


शर्मिष्ठा ययाति किस रूपक का उदाहरण है? -अङ्क


मालविका किस रूपक का उदाहरण है? -वीथी


समुद्रमन्थन किस रूपक का उदाहरण है? -समवकार


सौगन्धिकाहरण किस रूपक का उदाहरण है? -व्यायोग


त्रिपुरदाह किस रूपक का उदाहरण है? -डिम


धूर्तचरित किस रूपक का उदाहरण है? प्रहसन


लीलामधुकर किस रूपक का उदाहरण है? भाण


मृच्छकटिक किस रूपक का उदाहरण है? -प्रकरण


रूपक कितने प्रकार के हैं? १०


उपरूपक कितने प्रकार के हैं? १८


महाकाव्य को सर्वप्रथम किस आचार्य ने परिभाषित किया है? -भामह


महाकाव्य में सर्गों की न्यूनतम सीमा हैं? -८


महाकाव्य रचना में विचित्रमार्ग के प्रवर्तक आचार्य है? -भारवि
 

बौद्धदर्शन (सर्वदर्शनसङ्ग्रह)

  ·         व्याप्ति का ज्ञान तादात्म्य और उत्पत्ति से होता है। ·         तादात्म्य तथा उत्पत्ति अविनाभाव के दो रूप हैं। ·         ताद...